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mahabharat 12.68.38: जो उस राजा के हित में अनुरक्त रहता है और उसके भयंकर शासन का भार सहन करता है, वह इस लोक और परलोक दोनों में विजय प्राप्त करता है ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.68.38 
तस्य यो वहते भारं सर्वलोकभयावहम्।
तिष्ठन् प्रियहिते राज्ञ उभौ लोकाविमौ जयेत्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
जो उस राजा के हित में अनुरक्त रहता है और उसके भयंकर शासन का भार सहन करता है, वह इस लोक और परलोक दोनों में विजय प्राप्त करता है ॥38॥
 
He who remains attached to the welfare of that King and bears the burden of his dreadful rule, achieves victory in both this world and the next. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)