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mahabharat 12.68.36: जब राजा ने विशाल सैन्यबल के साथ अपनी प्रजा की रक्षा का भारी भार अपने कंधों पर उठाया, तब सारा जगत् सुखी हो गया ॥36॥   |   mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.68.36 
यदा राजा धुरं श्रेष्ठामादाय वहति प्रजा:।
महता बलयोगेन तदा लोक: प्रसीदति॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जब राजा ने विशाल सैन्यबल के साथ अपनी प्रजा की रक्षा का भारी भार अपने कंधों पर उठाया, तब सारा जगत् सुखी हो गया ॥36॥
 
When the king, with the help of a huge military force, shouldered the heavy burden of protecting his subjects, the entire world became happy. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)