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mahabharat 12.68.35: खेती आदि जीविका की उचित व्यवस्था ही इस संसार में जीवन का आधार है और तीन प्रकार की विद्याओं से ही संसार का पालन होता है जो वर्षा आदि का कारण हैं। जब राजा अपनी प्रजा की रक्षा करता है, तभी सब कुछ सुचारु रूप से चलता है ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.68.35 
वार्तामूलो ह्ययं लोकस्त्रय्या वै धार्यते सदा।
तत् सर्वं वर्तते सम्यग् यदा रक्षति भूमिप:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
खेती आदि जीविका की उचित व्यवस्था ही इस संसार में जीवन का आधार है और तीन प्रकार की विद्याओं से ही संसार का पालन होता है जो वर्षा आदि का कारण हैं। जब राजा अपनी प्रजा की रक्षा करता है, तभी सब कुछ सुचारु रूप से चलता है ॥35॥
 
Proper arrangements for livelihood like farming etc. are the basis of life in this world and the world is sustained by the three types of knowledge which are the cause of rain etc. When the king protects his subjects, only then everything runs smoothly. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)