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mahabharat 12.68.3: कहते हैं कि प्राचीन काल में कोसल के मुनियों में श्रेष्ठ राजा वसुमान ने शुद्धचित्त महर्षि बृहस्पति से कुछ प्रश्न पूछे थे॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.68.3 
राजा वसुमना नाम कौसल्यो धीमतां वर:।
महर्षिं किल पप्रच्छ कृतप्रज्ञं बृहस्पतिम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
कहते हैं कि प्राचीन काल में कोसल के मुनियों में श्रेष्ठ राजा वसुमान ने शुद्धचित्त महर्षि बृहस्पति से कुछ प्रश्न पूछे थे॥3॥
 
It is said that in ancient times, King Vasumana, the best among wise men of Kosala, asked some questions to the pure minded Maharishi Brihaspati. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)