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mahabharat 12.67.8: यदि वह शक्तिशाली आक्रमणकारी राजा शान्त दृष्टि से इस ओर देखे तो राज्य के लिए पूर्णतः कल्याणकारी होगा, किन्तु यदि वह क्रोधित हो जाए तो उस राज्य का समूल नाश कर सकता है ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.67: राष्ट्रकी रक्षा और उन्नतिके लिये राजाकी आवश्यकताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 67: राष्ट्रकी रक्षा और उन्नतिके लिये राजाकी आवश्यकताका प्रतिपादन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.67.8 
स चेत् समनुपश्येत समग्रं कुशलं भवेत्।
बलवान् हि प्रकुपित: कुर्यान्नि:शेषतामपि॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यदि वह शक्तिशाली आक्रमणकारी राजा शान्त दृष्टि से इस ओर देखे तो राज्य के लिए पूर्णतः कल्याणकारी होगा, किन्तु यदि वह क्रोधित हो जाए तो उस राज्य का समूल नाश कर सकता है ॥8॥
 
If that powerful attacking king looks at this with a calm eye then it would be completely good for the kingdom but if he becomes angry then he can bring about the total destruction of that kingdom. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)