Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.67.4: श्रुति कहती है, "जो लोग राजा को चुनते हैं, वे मानो इन्द्र को चुनते हैं।" अतः जो मनुष्य प्रजा का कल्याण चाहता है, उसे चाहिए कि वह राजा की उसी प्रकार पूजा करे, जैसे वह इन्द्र की पूजा करता है। ॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.67: राष्ट्रकी रक्षा और उन्नतिके लिये राजाकी आवश्यकताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन्द्रमेव प्रवृणुते यद्राजानमिति श्रुति:।
यथैवेन्द्रस्तथा राजा सम्पूज्यो भूतिमिच्छता॥ ४॥
अनुवाद
श्रुति कहती है, "जो लोग राजा को चुनते हैं, वे मानो इन्द्र को चुनते हैं।" अतः जो मनुष्य प्रजा का कल्याण चाहता है, उसे चाहिए कि वह राजा की उसी प्रकार पूजा करे, जैसे वह इन्द्र की पूजा करता है। ॥4॥
The Shruti says, "The people who choose the king, it is as if they choose Indra." Therefore, a person who wants the welfare of the people should worship the king as he worships Indra. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥