Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.67.36-37: यदि राजा दूसरों से पराजित हो जाए तो वह समस्त प्रजा के लिए दुःखदायी होता है; इसलिए प्रजा को चाहिए कि वह राजा को छत्र, वाहन, वस्त्र, आभूषण, भोजन, पेय, घर, आसन और शय्या आदि सब प्रकार की भौतिक वस्तुएँ भेंट करें ॥36-37॥ | mahabharat अध्याय 12.67: राष्ट्रकी रक्षा और उन्नतिके लिये राजाकी आवश्यकताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राज्ञ: परै: परिभव: सर्वेषामसुखावह:।
तस्माच्छत्रं च पत्रं च वासांस्याभरणानि च॥ ३६॥
भोजनान्यथ पानानि राज्ञे दद्युर्गृहाणि च।
आसनानि च शय्याश्च सर्वोपकरणानि च॥ ३७॥
अनुवाद
यदि राजा दूसरों से पराजित हो जाए तो वह समस्त प्रजा के लिए दुःखदायी होता है; इसलिए प्रजा को चाहिए कि वह राजा को छत्र, वाहन, वस्त्र, आभूषण, भोजन, पेय, घर, आसन और शय्या आदि सब प्रकार की भौतिक वस्तुएँ भेंट करें ॥36-37॥
If the king is defeated by others, it is painful for all the subjects; therefore the subjects should present all kinds of material things to the king such as umbrella, vehicle, clothes, ornaments, food, drink, house, seat and bed etc. ॥36-37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥