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mahabharat 12.67.32: तत्पश्चात् मनु ने वर्षा करने वाले मेघ की भाँति पृथ्वी पर भ्रमण करना आरम्भ किया, पापियों को शांत किया तथा उन्हें उनके वर्ण-जाति से मुक्ति दिलाने वाले कार्यों में लगाया।   |   mahabharat अध्याय 12.67: राष्ट्रकी रक्षा और उन्नतिके लिये राजाकी आवश्यकताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 67: राष्ट्रकी रक्षा और उन्नतिके लिये राजाकी आवश्यकताका प्रतिपादन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.67.32 
ततो महीं परिययौ पर्जन्य इव वृष्टिमान्।
शमयन् सर्वत: पापान् स्वकर्मसु च योजयन्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् मनु ने वर्षा करने वाले मेघ की भाँति पृथ्वी पर भ्रमण करना आरम्भ किया, पापियों को शांत किया तथा उन्हें उनके वर्ण-जाति से मुक्ति दिलाने वाले कार्यों में लगाया।
 
Thereafter, Manu, like a rain-giving cloud, started roaming around the earth, pacifying the sinners and engaging them in activities that liberate them from their varnas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)