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mahabharat 12.67.28: हे राजन! उस महान धर्म को सुखपूर्वक प्राप्त करके, जैसे इन्द्र देवताओं की रक्षा करते हैं, वैसे ही आप सब ओर से हमारी रक्षा करें॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 12.67: राष्ट्रकी रक्षा और उन्नतिके लिये राजाकी आवश्यकताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 67: राष्ट्रकी रक्षा और उन्नतिके लिये राजाकी आवश्यकताका प्रतिपादन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.67.28 
तेन धर्मेण महता सुखं लब्धेन भावित:।
पाह्यस्मान् सर्वतो राजन् देवानिव शतक्रतु:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! उस महान धर्म को सुखपूर्वक प्राप्त करके, जैसे इन्द्र देवताओं की रक्षा करते हैं, वैसे ही आप सब ओर से हमारी रक्षा करें॥ 28॥
 
'O King! Having attained that great Dharma happily, please protect us from all sides, just as Indra protects the gods.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)