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mahabharat 12.67.2: भीष्मजी ने कहा- युधिष्ठिर! राष्ट्र या राष्ट्र के नागरिकों का सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य एक योग्य राजा का अभिषेक करना है, क्योंकि राजा के बिना राष्ट्र दुर्बल होता है। डाकू और चोर उसे लूटते और परेशान करते हैं॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.67: राष्ट्रकी रक्षा और उन्नतिके लिये राजाकी आवश्यकताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 67: राष्ट्रकी रक्षा और उन्नतिके लिये राजाकी आवश्यकताका प्रतिपादन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.67.2 
भीष्म उवाच
राष्ट्र्रस्यैतत् कृत्यतमं राज्ञ एवाभिषेचनम्।
अनिन्द्रमबलं राष्ट्रं दस्यवोऽभिभवन्त्युत॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी ने कहा- युधिष्ठिर! राष्ट्र या राष्ट्र के नागरिकों का सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य एक योग्य राजा का अभिषेक करना है, क्योंकि राजा के बिना राष्ट्र दुर्बल होता है। डाकू और चोर उसे लूटते और परेशान करते हैं॥2॥
 
Bhishmaji said- Yudhishthira! The most important duty of the nation or the citizens of the nation is to anoint a capable king, because without a king, the nation is weak. Robbers and thieves rob and harass it.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)