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mahabharat 12.67.11: वीर! इस उपमा को ध्यान में रखते हुए, दुर्बल को बलवान के आगे झुकना चाहिए। जो बलवान को प्रणाम करता है, वह इंद्र को प्रणाम करने के समान है। 11.   |   mahabharat अध्याय 12.67: राष्ट्रकी रक्षा और उन्नतिके लिये राजाकी आवश्यकताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 67: राष्ट्रकी रक्षा और उन्नतिके लिये राजाकी आवश्यकताका प्रतिपादन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.67.11 
एतयोपमया वीर संनमेत बलीयसे।
इन्द्राय स प्रणमते नमते यो बलीयसे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वीर! इस उपमा को ध्यान में रखते हुए, दुर्बल को बलवान के आगे झुकना चाहिए। जो बलवान को प्रणाम करता है, वह इंद्र को प्रणाम करने के समान है। 11.
 
Brave! Keeping this simile in mind, the weak should bow down before the strong. One who bows down to the strong is like bowing down to Indra. 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)