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mahabharat 12.67.1: राजा युधिष्ठिर बोले, "पितामह! आपने चारों आश्रमों और चारों वर्णों का धर्म तो बता दिया। अब आप मुझे बताइए कि सम्पूर्ण राष्ट्र और उस राष्ट्र में रहने वाले प्रत्येक नागरिक का मुख्य कर्तव्य क्या है?"॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.67: राष्ट्रकी रक्षा और उन्नतिके लिये राजाकी आवश्यकताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 67: राष्ट्रकी रक्षा और उन्नतिके लिये राजाकी आवश्यकताका प्रतिपादन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.67.1 
युधिष्ठिर उवाच
चातुराश्रम्यमुक्तं ते चातुर्वर्ण्यं तथैव च।
राष्ट्रस्य यत् कृत्यतमं ततो ब्रूहि पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
राजा युधिष्ठिर बोले, "पितामह! आपने चारों आश्रमों और चारों वर्णों का धर्म तो बता दिया। अब आप मुझे बताइए कि सम्पूर्ण राष्ट्र और उस राष्ट्र में रहने वाले प्रत्येक नागरिक का मुख्य कर्तव्य क्या है?"॥1॥
 
King Yudhishthira said, "Grandfather! You have explained the religion of the four ashramas and the four varnas. Now tell me what is the main duty of the entire nation and every citizen living in that nation?"॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)