Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.65.30: जब भगवान प्रजापति ने इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की रचना की, तब उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए क्षात्र बल की स्थापना करने की इच्छा की, ताकि लोगों को अच्छे कर्मों में लगाया जा सके और उन्हें बुरे कर्मों से रोका जा सके ॥30॥ | mahabharat अध्याय 12.65: इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रजापतिर्हि भगवान् सर्वं चैवासृजज्जगत्।
स प्रवृत्तिनिवृत्त्यर्थं धर्माणां क्षत्रमिच्छति॥ ३०॥
अनुवाद
जब भगवान प्रजापति ने इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की रचना की, तब उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए क्षात्र बल की स्थापना करने की इच्छा की, ताकि लोगों को अच्छे कर्मों में लगाया जा सके और उन्हें बुरे कर्मों से रोका जा सके ॥30॥
When Lord Prajapati created this entire universe, he desired to establish the Kshatra force for the protection of Dharma in order to engage people in good deeds and to stop them from doing bad deeds. ॥30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥