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mahabharat 12.65.3: ऋषि-मुनि कहते हैं कि त्याग करने वाले ही श्रेष्ठ हैं। उसमें भी राजाओं द्वारा युद्ध में दिया जाने वाला शरीर ही सबसे बड़ा त्याग है। राजधर्म में सदैव तत्पर रहने वाले सभी भूमिपालों ने युद्ध में जिस प्रकार अपने प्राणों का बलिदान दिया, वह आपके नेत्रों के सामने है।   |   mahabharat अध्याय 12.65: इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 65: इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.65.3 
त्यागं श्रेष्ठं मुनयो वै वदन्ति
सर्वश्रेष्ठं यच्छरीरं त्यजन्त:।
नित्यं युक्ता राजधर्मेषु सर्वे
प्रत्यक्षं ते भूमिपाला यथैव॥ ३॥
 
 
अनुवाद
ऋषि-मुनि कहते हैं कि त्याग करने वाले ही श्रेष्ठ हैं। उसमें भी राजाओं द्वारा युद्ध में दिया जाने वाला शरीर ही सबसे बड़ा त्याग है। राजधर्म में सदैव तत्पर रहने वाले सभी भूमिपालों ने युद्ध में जिस प्रकार अपने प्राणों का बलिदान दिया, वह आपके नेत्रों के सामने है।
 
Rishis and sages say that only those who have given up are the best. In that too, the sacrifice that the kings make of their bodies in battle is the greatest sacrifice. The manner in which all the Bhumipalas, who were always engaged in Rajdharma, sacrificed their lives in the war is in front of your eyes. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)