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mahabharat 12.65.23: मान्धाता बोले - हे प्रभु! मनुष्य लोक में सभी वर्णों और चारों आश्रमों में डाकू और चोर दिखाई देते हैं, जो नाना प्रकार के वेशों में छिपे रहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.65: इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 65: इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.65.23 
मान्धातोवाच
दृश्यन्ते मानुषे लोके सर्ववर्णेषु दस्यव:।
लिङ्गान्तरे वर्तमाना आश्रमेषु चतुर्ष्वपि॥ २३॥
 
 
अनुवाद
मान्धाता बोले - हे प्रभु! मनुष्य लोक में सभी वर्णों और चारों आश्रमों में डाकू और चोर दिखाई देते हैं, जो नाना प्रकार के वेशों में छिपे रहते हैं।
 
Mandhaata said - O Lord! In the human world, robbers and thieves are seen in all the castes and the four ashramas, who keep themselves hidden in various disguises.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)