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mahabharat 12.65.21: कल्याण चाहने वाले पुरुष को चाहिए कि वह सब प्रकार के यज्ञ करें और ब्राह्मणों को खूब दक्षिणा दें। सब डाकुओं को चाहिए कि वे महँगे पाक यज्ञ करें और उसके लिए धन दें।॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.65: इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.65.21 
दक्षिणा सर्वयज्ञानां दातव्या भूतिमिच्छता।
पाकयज्ञा महार्हाश्च दातव्या: सर्वदस्युभि:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
कल्याण चाहने वाले पुरुष को चाहिए कि वह सब प्रकार के यज्ञ करें और ब्राह्मणों को खूब दक्षिणा दें। सब डाकुओं को चाहिए कि वे महँगे पाक यज्ञ करें और उसके लिए धन दें।॥21॥
 
A man who desires welfare should perform all kinds of sacrifices and give plenty of dakshina to the brahmins. All bandits should perform the costly Paaka Yagya and give money for it.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)