Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.65.13-15: मान्धाता बोले - "हे प्रभु! मेरे राज्य में यवन, किरात, गांधार, चीन, शबर, बरबर, शक, तुषार, कंक, पह्लव, आन्ध्र, मद्रक, पौण्ड्र, पुलिन्द, रामथ और कम्बोज देशों के म्लेच्छ सर्वत्र निवास करते हैं। इनमें से कुछ ब्राह्मण और क्षत्रियों की संतान भी हैं; कुछ वैश्य और शूद्र भी हैं, जो धर्ममार्ग से च्युत हो गए हैं। ये सभी चोरी और डकैती से अपनी जीविका चलाते हैं। ऐसे लोग धर्ममार्ग का पालन कैसे करेंगे? मेरे जैसे राजा इन्हें कैसे मर्यादा में रखें?"॥13-15॥ | mahabharat अध्याय 12.65: इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मान्धाता बोले - "हे प्रभु! मेरे राज्य में यवन, किरात, गांधार, चीन, शबर, बरबर, शक, तुषार, कंक, पह्लव, आन्ध्र, मद्रक, पौण्ड्र, पुलिन्द, रामथ और कम्बोज देशों के म्लेच्छ सर्वत्र निवास करते हैं। इनमें से कुछ ब्राह्मण और क्षत्रियों की संतान भी हैं; कुछ वैश्य और शूद्र भी हैं, जो धर्ममार्ग से च्युत हो गए हैं। ये सभी चोरी और डकैती से अपनी जीविका चलाते हैं। ऐसे लोग धर्ममार्ग का पालन कैसे करेंगे? मेरे जैसे राजा इन्हें कैसे मर्यादा में रखें?"॥13-15॥
Mandhaata said, "O Lord! In my kingdom, the Mlecchas from the countries of Yavanas, Kiratas, Gandharas, Chinas, Shabaras, Barbaras, Shakas, Tusharas, Kankas, Pahlavas, Andhras, Madrakas, Paundras, Pulindas, Ramathas and Kambojas reside everywhere. Some are also the children of Brahmins and Kshatriyas; some are Vaishyas and Shudras as well, who have fallen from the path of Dharma. All of them earn their livelihood by theft and robbery. How will such people follow the path of Dharma? How should kings like me keep them within limits?"॥13-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥