Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.65.11: जो ब्राह्मण कर्तव्य के विपरीत कर्म करता है, वह सम्मान पाने का अधिकारी नहीं है। जो ब्राह्मण अपने कर्तव्य का पालन नहीं करता, वह अविश्वसनीय माना जाता है।॥11॥ | mahabharat अध्याय 12.65: इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो विकर्मस्थितो विप्रो न स सम्मानमर्हति।
कर्म स्वं नोपयुञ्जानमविश्वास्यं हि तं विदु:॥ ११॥
अनुवाद
जो ब्राह्मण कर्तव्य के विपरीत कर्म करता है, वह सम्मान पाने का अधिकारी नहीं है। जो ब्राह्मण अपने कर्तव्य का पालन नहीं करता, वह अविश्वसनीय माना जाता है।॥11॥
A Brahmin who is engaged in the opposite of duty is not entitled to receive any respect. A Brahmin who does not perform his duty is considered untrustworthy.॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥