श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 64: राजधर्मकी श्रेष्ठताका वर्णन और इस विषयमें इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.64.6 
धर्माश्रमेऽध्यवसिनां ब्राह्मणानां युधिष्ठिर।
यथा त्रयाणां वर्णानां संख्यातोपश्रुति: पुरा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जिस प्रकार तीनों वर्णों के कर्तव्य क्षत्रिय-धर्म में सम्मिलित बताए गए हैं, उसी प्रकार नैष्ठिक ब्रह्मचारी, वानप्रस्थ और तपस्वी - इन तीनों आश्रमों में रहने वाले ब्राह्मणों के कर्तव्य गृहस्थाश्रम में सम्मिलित हैं॥6॥
 
Yudhishthira! Just as the duties of the three varnas have been described earlier as included in the kshatriya-dharma, in the same way the duties of the Brahmins in the three ashrams - Naishthik Brahmachari, Vanaprastha and Ascetic - are included in the Grihasthyashram.॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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