Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.64.5: जो धर्म प्रत्यक्ष है, अधिक सुख देने वाला है, आत्मसाक्षात्कार से युक्त है, छल रहित है और सबका हित करने वाला है, वही धर्म क्षत्रियों में आदर योग्य है। | mahabharat अध्याय 12.64: राजधर्मकी श्रेष्ठताका वर्णन और इस विषयमें इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो धर्म प्रत्यक्ष है, अधिक सुख देने वाला है, आत्मसाक्षात्कार से युक्त है, छल रहित है और सबका हित करने वाला है, वही धर्म क्षत्रियों में आदर योग्य है।
The religion which is evident, gives more happiness, is accompanied by the witness of the Self, is without deceit and is beneficial to all, that religion is respected among the Kshatriyas. 5.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥