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mahabharat 12.64.4: अतः धर्म के तत्त्व को न जानने वाले अन्य वक्ता अपने सुन्दर और तर्कपूर्ण वचनों से लोगों की श्रद्धा नष्ट कर देते हैं, फिर वे श्रोता व्यावहारिक उदाहरण न पाकर परलोक में नष्ट हो जाते हैं ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.64: राजधर्मकी श्रेष्ठताका वर्णन और इस विषयमें इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 64: राजधर्मकी श्रेष्ठताका वर्णन और इस विषयमें इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.64.4 
अपरे वचनै: पुण्यैर्वादिनो लोकनिश्चयम्।
अनिश्चयज्ञा धर्माणामदृष्टान्ते परे हता:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
अतः धर्म के तत्त्व को न जानने वाले अन्य वक्ता अपने सुन्दर और तर्कपूर्ण वचनों से लोगों की श्रद्धा नष्ट कर देते हैं, फिर वे श्रोता व्यावहारिक उदाहरण न पाकर परलोक में नष्ट हो जाते हैं ॥4॥
 
Therefore, other speakers who do not know the essence of religion, destroy the faith of people by their beautiful and logical words, then those listeners, not getting a practical example, get destroyed in the next world. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)