श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 64: राजधर्मकी श्रेष्ठताका वर्णन और इस विषयमें इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.64.3 
अप्रत्यक्षं बहुद्वारं धर्ममाश्रमवासिनाम्।
प्ररूपयन्ति तद्भावमागमैरेव शाश्वतम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
आश्रमवासियों का सनातन धर्म बहुद्वारीय और अप्रत्यक्ष है, विद्वान पुरुष शास्त्रों के द्वारा ही उसका स्वरूप निश्चित करते हैं ॥3॥
 
The Sanatan Dharma of the ashram residents is multi-door and indirect, learned men decide its form only through the scriptures. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)