श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 64: राजधर्मकी श्रेष्ठताका वर्णन और इस विषयमें इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.64.22 
शेषा: सृष्टा ह्यन्तवन्तो ह्यनन्ता:
सप्रस्थाना: क्षात्रधर्मा विशिष्टा:।
अस्मिन् धर्मे सर्वधर्मा: प्रविष्टा-
स्तस्माद् धर्मं श्रेष्ठमिमं वदन्ति॥ २२॥
 
 
अनुवाद
क्षात्रधर्म ही सर्वश्रेष्ठ है। शेष धर्म असंख्य हैं और उनके फल भी नाशवान हैं। इस क्षात्रधर्म में सभी धर्म समाहित हैं, इसीलिए इस धर्म को सर्वश्रेष्ठ कहा गया है॥ 22॥
 
Kshatradharma is the best. The rest of the dharmas are innumerable and their results are also perishable. All the dharmas are included in this Kshatradharma, that is why this dharma is called the best.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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