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mahabharat 12.64.13-14: राजसिंह! उस यज्ञ में राजा मान्धाता ने पृथ्वी पर सिर रखकर भगवान विष्णु के चरणों में प्रणाम किया। उस समय श्रीहरि ने देवराज इन्द्र का रूप धारण करके उनके समक्ष प्रकट हुए। 13-14॥   |   mahabharat अध्याय 12.64: राजधर्मकी श्रेष्ठताका वर्णन और इस विषयमें इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 64: राजधर्मकी श्रेष्ठताका वर्णन और इस विषयमें इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  12.64.13-14 
स राजा राजशार्दूल मान्धाता परमेश्वरम्॥ १३॥
जगाम शिरसा पादौ यज्ञे विष्णोर्महात्मन:।
दर्शयामास तं विष्णू रूपमास्थाय वासवम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजसिंह! उस यज्ञ में राजा मान्धाता ने पृथ्वी पर सिर रखकर भगवान विष्णु के चरणों में प्रणाम किया। उस समय श्रीहरि ने देवराज इन्द्र का रूप धारण करके उनके समक्ष प्रकट हुए। 13-14॥
 
Rajsingh! In that Yagya, King Mandhata bowed down to the feet of Lord Vishnu with his head on the earth. At that time, Shri Hari took the form of Devraj Indra and appeared before him. 13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)