श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 64: राजधर्मकी श्रेष्ठताका वर्णन और इस विषयमें इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.64.11 
अत्र ते वर्तयिष्यामि धर्ममर्थविनिश्चयम्।
निर्मर्यादे वर्तमाने दानवैकार्णवे पुरा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
मैं तुम्हें एक धार्मिक कथा सुनाता हूँ, जो इस विषय का यथार्थ अर्थ समझाएगी। पूर्वकाल में सारा जगत् दैत्यरूपी समुद्र में डूबकर अस्तव्यस्त हो गया था ॥11॥
 
I will tell you a religious story which will explain the true meaning of this matter. In the past, the whole world had become chaotic after drowning in the ocean of demonism. ॥11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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