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mahabharat 12.64.1: भीष्म कहते हैं - हे पाण्डुपुत्र! चारों आश्रमों के धर्म, तपस्वी धर्म, लौकिक और वैदिक उत्तम धर्म - ये सब क्षात्रधर्म में प्रतिष्ठित हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.64: राजधर्मकी श्रेष्ठताका वर्णन और इस विषयमें इन्द्ररूपधारी विष्णु और मान्धाताका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.64.1 
भीष्म उवाच
चातुराश्रम्यधर्माश्च यतिधर्माश्च पाण्डव।
लोकवेदोत्तराश्चैव क्षात्रधर्मे समाहिता:॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - हे पाण्डुपुत्र! चारों आश्रमों के धर्म, तपस्वी धर्म, लौकिक और वैदिक उत्तम धर्म - ये सब क्षात्रधर्म में प्रतिष्ठित हैं।
 
Bhishma says - O son of Pandu! The religions of the four ashrams, the ascetic religion, the worldly and Vedic excellent religions are all established in Kshatradharma. 1.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)