| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 63: वर्णाश्रमधर्मका वर्णन तथा राजधर्मकी श्रेष्ठता » श्लोक 16-21 |
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| | | | श्लोक 12.63.16-21  | वेदानधीत्य धर्मेण राजशास्त्राणि चानघ।
संतानादीनि कर्माणि कृत्वा सोमं निषेव्य च॥ १६॥
पालयित्वा प्रजा: सर्वा धर्मेण वदतां वर।
राजसूयाश्वमेधादीन् मखानन्यांस्तथैव च॥ १७॥
आनयित्वा यथापाठं विप्रेभ्यो दत्तदक्षिण:।
संग्रामे विजयं प्राप्य तथाल्पं यदि वा बहु॥ १८॥
स्थापयित्वा प्रजापालं पुत्रं राज्ये च पाण्डव।
अन्यगोत्रं प्रशस्तं वा क्षत्रियं क्षत्रियर्षभ॥ १९॥
अर्चयित्वा पितॄन् सम्यक् पितृयज्ञैर्यथाविधि।
देवान् यज्ञैर्ऋषीन् वेदैरर्चयित्वा तु यत्नत:॥ २०॥
अन्तकाले च सम्प्राप्ते य इच्छेदाश्रमान्तरम्।
सोऽनुपूर्व्याश्रमान् राजन् गत्वा सिद्धिमवाप्नुयात् ॥ २१॥ | | | | | | अनुवाद | | हे निष्पाप राजा! राजा को चाहिए कि वह पहले धर्मपूर्वक वेदों और राजशास्त्रों का अध्ययन करे। फिर सन्तानोत्पत्ति आदि अनुष्ठानों को पूर्ण करके यज्ञ में सोमरस का सेवन करे। सब प्रजाजनों का धर्मानुसार पालन करके राजसूय, अश्वमेध आदि यज्ञों का अनुष्ठान करे। शास्त्रों के निर्देशानुसार समस्त सामग्री एकत्रित करके ब्राह्मणों को दक्षिणा दे। युद्ध में छोटी या बड़ी विजय प्राप्त करके प्रजा की रक्षा के लिए अपने पुत्र को राज्य पर स्थापित करे। यदि पुत्र न हो तो किसी अन्य कुल के श्रेष्ठ क्षत्रिय को राजसिंहासन पर अभिषिक्त करे। क्षत्रियशिरोमणि पाण्डुनन्दन, श्रेष्ठ वक्ता! जो क्षत्रिय अंत समय में अन्य आश्रमों को ग्रहण करना चाहता है, वह पितृयज्ञों द्वारा पितरों का, देवयज्ञों द्वारा देवताओं का और वेदों के स्वाध्याय द्वारा ऋषियों का यत्नपूर्वक पूजन करके क्रमशः आश्रमों को ग्रहण करके परम सिद्धि प्राप्त करता है। 16-21॥ | | | | Sinless king! The king should first study the Vedas and Rajshastras in a religious manner. Then after completing the rituals like procreating children etc., consume Somras in the Yagya. Perform the rituals of Rajsuya, Ashvamedha and other yagyas by following all the subjects according to their religion. As per the instructions of the scriptures, collect all the material and give it as dakshina to the Brahmins. After getting a small or great victory in the battle, install your son on the kingdom for the protection of the people. If you do not have a son, then anoint some great Kshatriya of another clan on the throne. Kshatriya Shiromani Pandunandan, the best speaker! The Kshatriya who wishes to adopt other Ashrams when the end comes, after diligently worshiping the ancestors through the Pitriyagyas, the Gods through the Devyagyas and the sages through self-study of the Vedas, attains ultimate success by adopting the Ashrams respectively. 16-21॥ | | ✨ ai-generated | | |
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