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mahabharat 12.63.10: यदि भगवान विष्णु उचित विधान न करें, तो संसार में सभी मनुष्यों को मिलने वाले सुख आदि नहीं रहेंगे। चारों वर्णों और वेदों के सिद्धांत जीवित नहीं रह सकेंगे। समस्त यज्ञ और समस्त संसार के कार्यकलाप रुक जाएँगे और आश्रमों में रहने वाले सभी लोग तत्काल नष्ट हो जाएँगे।॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.63: वर्णाश्रमधर्मका वर्णन तथा राजधर्मकी श्रेष्ठता   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 63: वर्णाश्रमधर्मका वर्णन तथा राजधर्मकी श्रेष्ठता  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.63.10 
लोके चेदं सर्वलोकस्य न स्या-
च्चातुर्वर्ण्यं वेदवादाश्च न स्यु:।
सर्वाश्चेज्या: सर्वलोकक्रियाश्च
सद्य: सर्वे चाश्रमस्था न वै स्यु:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यदि भगवान विष्णु उचित विधान न करें, तो संसार में सभी मनुष्यों को मिलने वाले सुख आदि नहीं रहेंगे। चारों वर्णों और वेदों के सिद्धांत जीवित नहीं रह सकेंगे। समस्त यज्ञ और समस्त संसार के कार्यकलाप रुक जाएँगे और आश्रमों में रहने वाले सभी लोग तत्काल नष्ट हो जाएँगे।॥10॥
 
If Lord Vishnu does not make appropriate laws, then the happiness etc. available to all people in the world will not remain. The principles of the four Varnas and the Vedas will not be able to survive. All the Yagyas and the activities of the whole world will stop and all the people living in the ashrams will be destroyed immediately.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)