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mahabharat 12.61.13: हे प्रिये! इस प्रसंग में महर्षि महान अर्थों से युक्त तथा महान तप से प्रेरित नारायण गीता का उल्लेख करते हैं। मैं उसका वर्णन कर रहा हूँ, तुम सुनो।   |   mahabharat अध्याय 12.61: आश्रम-धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 61: आश्रम-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.61.13 
अथात्र नारायणगीतमाहु-
र्महर्षयस्तात महानुभावा:।
महार्थमत्यन्ततप:प्रयुक्तं
तदुच्यमानं हि मया निबोध॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिये! इस प्रसंग में महर्षि महान अर्थों से युक्त तथा महान तप से प्रेरित नारायण गीता का उल्लेख करते हैं। मैं उसका वर्णन कर रहा हूँ, तुम सुनो।
 
O dear! In this context, great sages mention the Narayana Geeta which is full of great meaning and is inspired by great penance. I am describing it, you listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)