Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.60.50: (बह्वृच्छ ब्राह्मण में अग्निहोत्र के सोलह प्रकार बताए गए हैं) वायु देवता के निमित्त होता द्वारा किया गया हवन प्रथम है और उससे भिन्न, स्कण्णसंग नामक हवन अंतिम या उत्तम है। इसी प्रकार रौद्र आदि अनेक यज्ञ हैं, जो नाना प्रकार के कर्मफल देने वाले हैं ॥50॥ | mahabharat अध्याय 12.60: वर्ण-धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(बह्वृच्छ ब्राह्मण में अग्निहोत्र के सोलह प्रकार बताए गए हैं) वायु देवता के निमित्त होता द्वारा किया गया हवन प्रथम है और उससे भिन्न, स्कण्णसंग नामक हवन अंतिम या उत्तम है। इसी प्रकार रौद्र आदि अनेक यज्ञ हैं, जो नाना प्रकार के कर्मफल देने वाले हैं ॥50॥
(Sixteen types of Agnihotra have been described in Bahvricha Brahmana) The havan performed by Hota for the purpose of Vayu Devta is the first and the one different from it, the one known as Skannasang is the last or the best. Similarly, there are many yagnas like Raudra etc., which give various types of results of actions. ॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥