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mahabharat 12.60.49: जब कोई श्रद्धालु और जितेन्द्रिय व्यक्ति सूर्योदय के समय अथवा सूर्योदय से पूर्व ही अपने धर्मानुसार अग्नि में आहुति देता है, तो उसके पीछे श्रद्धा ही मुख्य उद्देश्य होती है ॥49॥   |   mahabharat अध्याय 12.60: वर्ण-धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 60: वर्ण-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.60.49 
उदितेऽनुदिते वापि श्रद्दधानो जितेन्द्रिय:।
वह्निं जुहोति धर्मेण श्रद्धा वै कारणं महत्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
जब कोई श्रद्धालु और जितेन्द्रिय व्यक्ति सूर्योदय के समय अथवा सूर्योदय से पूर्व ही अपने धर्मानुसार अग्नि में आहुति देता है, तो उसके पीछे श्रद्धा ही मुख्य उद्देश्य होती है ॥49॥
 
'When a devout and Jitendriya person makes an offering to the fire as per his religion, at the rising of the sun or even before the sunrise, faith is the main motive behind it. 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)