Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.60.47: सृष्टिकर्ता एक ही ब्रह्म से अन्य तीन वर्णों की रचना करता है, अतः अन्य तीन वर्ण भी ब्रह्म के समान ही सरल हैं और उसके जाति-बंधु या सम्बन्धी हैं। क्षत्रिय से प्रारम्भ होकर तीनों वर्ण ब्रह्म की संतान हैं। जिस प्रकार ऋग्, यजु और साम एक ही आ से प्रकट होने के कारण एक-दूसरे से अभिन्न हैं, उसी प्रकार यदि इन सभी वर्णों का सार निश्चित किया जाए तो इन सबके रूप में ब्रह्म ही प्रकट हुआ है, अतः सभी ब्रह्म से अभिन्न हैं। 47 | mahabharat अध्याय 12.60: वर्ण-धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सृष्टिकर्ता एक ही ब्रह्म से अन्य तीन वर्णों की रचना करता है, अतः अन्य तीन वर्ण भी ब्रह्म के समान ही सरल हैं और उसके जाति-बंधु या सम्बन्धी हैं। क्षत्रिय से प्रारम्भ होकर तीनों वर्ण ब्रह्म की संतान हैं। जिस प्रकार ऋग्, यजु और साम एक ही आ से प्रकट होने के कारण एक-दूसरे से अभिन्न हैं, उसी प्रकार यदि इन सभी वर्णों का सार निश्चित किया जाए तो इन सबके रूप में ब्रह्म ही प्रकट हुआ है, अतः सभी ब्रह्म से अभिन्न हैं। 47
The Creator creates the other three Varnas from only one Brahman, hence the other three Varnas are also as simple as Brahman and are his caste-brothers or relatives. The three Varnas, starting from Kshatriya, are the progeny of Brahman. Just as Rig, Yaju and Sama are inseparable from each other due to their manifestation from only one Aa, similarly if the essence of all these Varnas is determined then only Brahman has manifested in the form of all of them, hence all are inseparable from Brahman. 47.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥