Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.60.46: ब्राह्मण अपने कर्मों से अन्य जातियों के लिए सदैव देवता के समान होता है; अतः यह सत्य नहीं है कि वह अन्य जातियों के यज्ञ नहीं करता। जिस यज्ञ में वैश्य आचार्य आदि का कार्य करता है, वह यज्ञ निकृष्ट माना जाता है। विधाता ने तीनों जातियों के यज्ञ करने के लिए ही ब्राह्मण को उत्पन्न किया है॥ 46॥ | mahabharat अध्याय 12.60: वर्ण-धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मण अपने कर्मों से अन्य जातियों के लिए सदैव देवता के समान होता है; अतः यह सत्य नहीं है कि वह अन्य जातियों के यज्ञ नहीं करता। जिस यज्ञ में वैश्य आचार्य आदि का कार्य करता है, वह यज्ञ निकृष्ट माना जाता है। विधाता ने तीनों जातियों के यज्ञ करने के लिए ही ब्राह्मण को उत्पन्न किया है॥ 46॥
By his actions, a Brahmin is always like a deity for the other castes; hence it is not true that he does not perform the yajnas of other castes. The yajna in which a Vaishya is acting as an Acharya etc. is considered inferior. The Creator has created only the Brahmin to perform the yajnas of the three castes.॥ 46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥