Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.60.41: क्योंकि श्रद्धा ही सबसे बड़ा देवता है। यह यज्ञ करने वालों को पवित्र करती है। ब्राह्मणों को सर्वोच्च देवता माना जाता है क्योंकि वे स्वयं यज्ञ करते हैं। सभी जातियों के लोग अपने-अपने कर्मों से यज्ञों में एक-दूसरे की सहायता करते हैं। | mahabharat अध्याय 12.60: वर्ण-धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दैवतं हि महच्छ्रद्धा पवित्रं यजतां च यत्।
दैवतं हि परं विप्रा: स्वेन स्वेन परस्परम्॥ ४१॥
अनुवाद
क्योंकि श्रद्धा ही सबसे बड़ा देवता है। यह यज्ञ करने वालों को पवित्र करती है। ब्राह्मणों को सर्वोच्च देवता माना जाता है क्योंकि वे स्वयं यज्ञ करते हैं। सभी जातियों के लोग अपने-अपने कर्मों से यज्ञों में एक-दूसरे की सहायता करते हैं।
Because faith is the greatest deity. It purifies those who perform yajnas. Brahmins are considered to be the supreme deities because they personally perform yajnas. People of all castes help each other in yajnas through their respective actions.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥