Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.60.26: दूसरों की अन्न-फसलों तथा सभी प्रकार के बीजों की रक्षा के लिए वैश्य को उपज का सातवाँ भाग वेतन के रूप में लेना चाहिए। यही उसका वार्षिक वेतन है। वैश्य के मन में कभी यह संकल्प नहीं आना चाहिए कि 'मैं पशुओं की रक्षा नहीं करूँगा'। 26॥ | mahabharat अध्याय 12.60: वर्ण-धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सस्यानां सर्वबीजानामेषा सांवत्सरी भृति:।
न च वैश्यस्य काम: स्यान्न रक्षेयं पशूनिति॥ २६॥
अनुवाद
दूसरों की अन्न-फसलों तथा सभी प्रकार के बीजों की रक्षा के लिए वैश्य को उपज का सातवाँ भाग वेतन के रूप में लेना चाहिए। यही उसका वार्षिक वेतन है। वैश्य के मन में कभी यह संकल्प नहीं आना चाहिए कि 'मैं पशुओं की रक्षा नहीं करूँगा'। 26॥
For protecting other people's grain crops and all types of seeds, a Vaishya should take one-seventh of the produce as salary. This is his annual salary. A resolution should never arise in the mind of a Vaishya that 'I will not take care of animals'. 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥