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परिनिष्ठितकार्यस्तु नृपति: परिपालनात्।
कुर्यादन्यन्न वा कुर्यादैन्द्रो राजन्य उच्यते॥ २०॥
अनुवाद
राजा अन्य कोई कार्य करे या न करे, वह केवल अपनी प्रजा की रक्षा करके ही संतुष्ट रहता है। चूँकि उसमें इन्द्रदेव से संबंधित शक्ति प्रबल होती है, इसलिए राजा को 'ऐन्द्र' कहा जाता है।
Whether the king does any other work or not, he is satisfied by merely protecting his subjects. Since the power related to the god Indra is predominant in him, the king is called 'Aindra'.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥