Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.60.17-18: इस प्रकार क्षत्रियों के लिए युद्ध ही मुख्य मार्ग है, उनके लिए लुटेरों को मारने से बढ़कर कोई श्रेष्ठ कर्म नहीं है। यद्यपि दान, अध्ययन और यज्ञ करने से भी राजाओं का कल्याण होता है, तथापि उनके लिए युद्ध ही श्रेष्ठ है; अतः धर्म की विशेष इच्छा रखने वाले राजा को युद्ध के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए॥17-18॥ | mahabharat अध्याय 12.60: वर्ण-धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार क्षत्रियों के लिए युद्ध ही मुख्य मार्ग है, उनके लिए लुटेरों को मारने से बढ़कर कोई श्रेष्ठ कर्म नहीं है। यद्यपि दान, अध्ययन और यज्ञ करने से भी राजाओं का कल्याण होता है, तथापि उनके लिए युद्ध ही श्रेष्ठ है; अतः धर्म की विशेष इच्छा रखने वाले राजा को युद्ध के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए॥17-18॥
Thus war is the main path for the Kshatriyas, for them there is no better deed than killing robbers. Although charity, study and performing sacrifices also bring welfare to the kings, yet war is the best for them; hence a king who especially desires Dharma should always be ready for war.॥17-18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥