Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.6.9-10: अपनी माता की यह बात सुनकर धर्मराज युधिष्ठिर की आँखों में आँसू भर आए। उनकी इंद्रियाँ शोक से व्याकुल हो गईं और धर्मात्मा राजा ने उनसे कहा, 'माता, आपने यह रहस्य गुप्त रखकर मुझे बहुत दुःख पहुँचाया है।' | mahabharat अध्याय 12.6: युधिष्ठिरकी चिन्ता, कुन्तीका उन्हें समझाना और स्त्रियोंको युधिष्ठिरका शाप । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपनी माता की यह बात सुनकर धर्मराज युधिष्ठिर की आँखों में आँसू भर आए। उनकी इंद्रियाँ शोक से व्याकुल हो गईं और धर्मात्मा राजा ने उनसे कहा, 'माता, आपने यह रहस्य गुप्त रखकर मुझे बहुत दुःख पहुँचाया है।'
On hearing his mother say this, tears filled the eyes of Dharmaraja Yudhishthira. His senses were overwhelmed with grief and the righteous king said to her, 'Mother, you have caused me great pain by keeping this secret a secret.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥