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mahabharat 12.6.7: परंतु भगवान सूर्य और मैं दोनों ही आपको अपनी ओर मिलाने में अथवा स्नेह दिखाकर आपसे मेल कराने में सफल नहीं हुए॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.6: युधिष्ठिरकी चिन्ता, कुन्तीका उन्हें समझाना और स्त्रियोंको युधिष्ठिरका शाप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 6: युधिष्ठिरकी चिन्ता, कुन्तीका उन्हें समझाना और स्त्रियोंको युधिष्ठिरका शाप  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.6.7 
न चैनमशकद् भानुरहं वा स्नेहकारणै:।
पुरा प्रत्यनुनेतुं वा नेतुं वाप्येकतां त्वया॥ ७॥
 
 
अनुवाद
परंतु भगवान सूर्य और मैं दोनों ही आपको अपनी ओर मिलाने में अथवा स्नेह दिखाकर आपसे मेल कराने में सफल नहीं हुए॥7॥
 
‘But both Lord Surya and I were not successful in getting you on our side or in uniting you by showing our affection.॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)