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शशाप च महातेजा: सर्वलोकेषु योषित:।
न गुह्यं धारयिष्यन्तीत्येवं दु:खसमन्वित:॥ ११॥
अनुवाद
तब महाबली युधिष्ठिर ने अत्यंत दुःखी होकर समस्त संसार की स्त्रियों को श्राप दे दिया कि 'आज से स्त्रियाँ अपने हृदय का कोई भी रहस्य नहीं छिपा सकेंगी।'
Then the mighty Yudhishthira, being very sad, cursed the women of the whole world that 'from today onwards women will not be able to hide any secret of their heart.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥