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mahabharat 12.6.1: वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! इतना कहकर देवर्षि नारद तो चुप हो गये, परन्तु राजा मुनि युधिष्ठिर दुःखी हो गये और चिंता करने लगे। 1॥   |   mahabharat अध्याय 12.6: युधिष्ठिरकी चिन्ता, कुन्तीका उन्हें समझाना और स्त्रियोंको युधिष्ठिरका शाप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 6: युधिष्ठिरकी चिन्ता, कुन्तीका उन्हें समझाना और स्त्रियोंको युधिष्ठिरका शाप  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.6.1 
वैशम्पायन उवाच
एतावदुक्त्वा देवर्षिर्विरराम स नारद:।
युधिष्ठिरस्तु राजर्षिर्दध्यौ शोकपरिप्लुत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! इतना कहकर देवर्षि नारद तो चुप हो गये, परन्तु राजा मुनि युधिष्ठिर दुःखी हो गये और चिंता करने लगे। 1॥
 
Vaishampayanji says- Rajan! Saying this, Devarshi Narad became silent, but King Sage Yudhishthir became sad and started worrying. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)