vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन
»
श्लोक 98
श्लोक
12.59.98
भूयोऽस्य दक्षिणं पाणिं ममन्थुस्ते महर्षय:।
तत: पुरुष उत्पन्नो रूपेणेन्द्र इवापर:॥ ९८॥
अनुवाद
इसके बाद ऋषियों ने पुनः वेन के दाहिने हाथ का मंथन किया, जिससे एक अन्य पुरुष प्रकट हुआ, जो देवराज इन्द्र के समान ही था।
After this, the sages churned the right hand of Vena again. From that, another man appeared, who was similar in appearance to Devraja Indra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×