धर्मश्चार्थश्च कामश्च मोक्षश्चात्रानुवर्णिता:।
उपायाश्चार्थलिप्सा च विविधा भूरिदक्षिण॥ ७२॥
अनुवाद
हे प्रचुर दक्षिणा देने वाले युधिष्ठिर! इस ग्रन्थ में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, उनकी प्राप्ति के उपाय तथा नाना प्रकार के अर्थ-वासनाओं का भी वर्णन है ॥72॥
Yudhishthir, the one who gives abundant dakshina! In this book, there is also a description of religion, artha, kama and moksha, the ways to achieve them and various types of wealth-lust. 72॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)