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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन
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श्लोक 20
श्लोक
12.59.20
अगम्यागमनं चैव वाच्यावाच्यं तथैव च।
भक्ष्याभक्ष्यं च राजेन्द्र दोषादोषं च नात्यजन्॥ २०॥
अनुवाद
राजेन्द्र! उन्होंने वाणी से या अवाणी से, भक्ष्य से या अभक्ष्य से, दोष से या दोष से रहित, अनाचार से कुछ भी नहीं छोड़ा ॥20॥
Rajendra! He did not leave anything out of incest, spoken or non-verbal, edible or non-edible or blameless or blameless. 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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