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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन
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श्लोक 137
श्लोक
12.59.137
योऽस्य वै मुखमद्राक्षीत् सौम्यं सोऽस्य वशानुग:।
सुभगं चार्थवन्तं च रूपवन्तं च पश्यति॥ १३७॥
अनुवाद
जिसने राजा का सौम्य मुख देखा है, वह उसके अधीन हो जाता है। प्रत्येक व्यक्ति राजा को सौभाग्यशाली, धनवान और सुन्दर देखता है। 137.
Whoever has seen the gentle face of the king becomes subservient to him. Every person sees the king as fortunate, wealthy and handsome. 137.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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