तपसा भगवान् विष्णुराविवेश च भूमिपम्।
देववन्नरदेवानां नमते यं जगन्नृपम्॥ १२८॥
अनुवाद
राजा पृथुकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु स्वयं उनमें प्रविष्ट हुए । समस्त राजाओं में राजा पृथु के समक्ष ही समस्त जगत ने देवता के समान अपना मस्तक झुकाया । 128॥
Pleased with King Prithuki's penance, Lord Vishnu himself entered him. Among all the kings, it was to King Prithu that the whole world bowed its head like a god. 128॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)