vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन
»
श्लोक 127
श्लोक
12.59.127
स्थापनं चाकरोद् विष्णु: स्वयमेव सनातन:।
नातिवर्तिष्यते कश्चिद् राजंस्त्वामिति भारत॥ १२७॥
अनुवाद
भरतनन्दन! स्वयं सनातन भगवान विष्णु ने उनके लिए यह मर्यादा स्थापित की कि 'राजन! आपकी आज्ञा का उल्लंघन कोई नहीं कर सकेगा ॥127॥
Bharatnandan! Eternal Lord Vishnu himself established this dignity for him that 'King! No one will be able to violate your orders. 127॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×