श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 120-121h
 
 
श्लोक  12.59.120-121h 
हया रथाश्च नागाश्च कोटिश: पुरुषास्तथा॥ १२०॥
प्रादुर्बभूवुर्वैन्यस्य चिन्तनादेव पाण्डव।
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! वेनपुत्र पृथु के विचार करते ही घोड़े, रथ, हाथी और करोड़ों मनुष्य उनकी सेवा में उपस्थित हो गए ॥120 1/2॥
 
Pandunandan! As soon as Venaputra Prithu started thinking, horses, chariots, elephants and crores of people appeared in his service. 120 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)