श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.59.11 
एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं तत्त्वेन भरतर्षभ।
कृत्स्नं तन्मे यथातत्त्वं प्रब्रूहि वदतां वर॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! इसका क्या कारण है? मैं इसे यथार्थ रूप में सुनना चाहता हूँ। हे वक्ताओं में श्रेष्ठ पितामह! कृपया इस सम्पूर्ण रहस्य को यथार्थ रूप में मुझसे कहिए।॥11॥
 
O best of the Bharatas! What is the reason for this? I want to hear it in its true form. O great grandfather, the best among speakers! Please tell me this entire mystery in its true form. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)