vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 59: ब्रह्माजीके नीतिशास्त्रका तथा राजा पृथुके चरित्रका वर्णन
»
श्लोक 107
श्लोक
12.59.107
यश्चात्र धर्मो नित्योक्तो दण्डनीतिव्यपाश्रय:।
तमशङ्क: करिष्यामि स्ववशो न कदाचन॥ १०७॥
अनुवाद
मैं वेदों में वर्णित दण्डनीति से संबंधित सनातन धर्म का पालन बिना किसी संदेह के करूंगा। मैं कभी मुक्त नहीं होऊंगा।॥107॥
'I will follow the eternal Dharma related to punishment policy mentioned in the Vedas without any doubt. I will never be free.'॥ 107॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×